मौनी अमावस्या 2026: अंतर्मन की मौन यात्रा और आत्म-साक्षात्कार का पर्व
लेखिका: एडवोकेट एवं एस्ट्रोलॉजर सुदेश शर्मा प्रस्तुति: शक्ति राइज ग्लोबल फाउंडेशन (Shakti Rise Global Foundation) (आधार: इंडियन नॉलेज सिस्टम – IKS)प्रस्तावनासनातन धर्म और भारतीय ज्ञान परंपरा (Indian Knowledge System) में ‘मौन’ को केवल चुप रहना नहीं, बल्कि स्वयं से जुड़ने का सबसे सशक्त माध्यम माना गया है।
शक्ति राइज ग्लोबल फाउंडेशन का सदैव यह प्रयास रहता है कि हम प्राचीन भारतीय प्रज्ञा को आधुनिक जीवन का आधार बनाएं। माघ मास की यह मौनी अमावस्या, इसी अंतर्मुखी होने की वैज्ञानिक प्रक्रिया का उत्सव है।
ज्योतिषीय एवं आध्यात्मिक महत्वज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब गोचर में चंद्रमा और सूर्य दोनों एक साथ मकर राशि में प्रवेश करते हैं, तब मौनी अमावस्या का पावन योग बनता है।चंद्रमा (मन) और सूर्य (आत्मा) का यह मिलन जीव को अपनी चंचल वृत्तियों को शांत करने का अवसर देता है।मकर राशि अनुशासन और कर्म की राशि है। यहाँ मौन का अभ्यास करने से मानसिक शक्ति और संकल्प बल (Will Power) की अभूतपूर्व वृद्धि होती है।
मौन का विज्ञान: शक्ति राइज ग्लोबल फाउंडेशन का दृष्टिकोण हमारी संस्था शिक्षा के उस आधार पर कार्य करती है जहाँ ऋषियों का अनुभव और आधुनिक विज्ञान एक धरातल पर मिलते हैं:ऊर्जा का संचय: हमारी वाक्-शक्ति ऊर्जा का एक बड़ा हिस्सा खर्च करती है। मौन रहने से वही ऊर्जा मस्तिष्क की कोशिकाओं को पुनर्जीवित करने और मेधा शक्ति को बढ़ाने में लगती है।
आत्म-चिंतन (Self-Reflection): बाहरी शोर कम होने पर ही हम अपने भीतर की आवाज सुन पाते हैं, जो ‘आत्म-बोध’ की दिशा में पहला कदम है।मानसिक
स्वास्थ्य: मौन का अभ्यास ‘कॉर्टिसोल’ (तनाव हार्मोन) को कम कर मानसिक शांति और एकाग्रता प्रदान करता है।आज के दिन के विशेष अनुष्ठान और साधना
मौन व्रत: संभव हो तो पूरे दिन या कुछ घंटों के लिए मौन रहें। यदि पूर्ण मौन संभव न हो, तो केवल ‘मृदु’ और ‘सत्य’ वचन ही बोलें।
पवित्र स्नान: इस दिन गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान का फल अनंत गुना होता है। घर पर स्नान करते समय जल में थोड़ा गंगाजल मिलाकर वरुण देव का ध्यान करें।
तर्पण और दान: पितरों की शांति के लिए यह उत्तम तिथि है। शक्ति राइज ग्लोबल फाउंडेशन मानवता की सेवा को सर्वोपरि मानती है, अतः आज के दिन तिल, गुड़ और गरम वस्त्रों का दान अवश्य करें।
मानसिक जाप: ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ या ‘ॐ नमः शिवाय’ का मानसिक जाप करते हुए अपने अंतर्मन की शुद्धि करें।”मौनं सर्वार्थ साधनम्” – अर्थात, मौन से ही सभी कार्यों की सिद्धि और परम सत्य की प्राप्ति संभव है।
निष्कर्ष : मौनी अमावस्या केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक शुद्धि (Psychological Detox) का एक गहरा विज्ञान है। आइए, आज कुछ समय एकांत में बिताएं और अपने भीतर के उस शून्य को खोजें जहाँ केवल अनंत शांति और ईश्वर का वास है।
शक्ति राइज ग्लोबल फाउंडेशन आप सभी के जीवन में सुख, शांति और आध्यात्मिक उन्नति की मंगल कामना करता है।
सादर, एडवोकेट एवं एस्ट्रोलॉजर सुदेश शर्मा संस्थापिका, शक्ति राइज ग्लोबल फाउंडेशन शिक्षा का आधार: इंडियन नॉलेज सिस्टम (IKS)


