माघ पूर्णिमा 2026: रवि-पुष्य योग और भारतीय ज्ञान परंपरा का दिव्य संगम​

लेखिका: एडवोकेट सुदेश शर्मा(ज्योतिषाचार्य एवं संस्थापक – शक्ति राइज ग्लोबल फाउंडेशन)​प्रस्तावना​भारतीय काल-गणना में माघ मास की पूर्णिमा का स्थान अत्यंत विशिष्ट है। इस वर्ष 1 फरवरी 2026 को आने वाली माघी पूर्णिमा केवल एक धार्मिक तिथि मात्र नहीं है, बल्कि यह खगोलीय घटनाओं, आयुर्वेद और आध्यात्मिक चेतना का एक महामिलन है। विशेष बात यह है कि इस पावन तिथि पर ‘नक्षत्रों के राजा’ पुष्य का संयोग बन रहा है, जो रविवार होने के कारण ‘रवि-पुष्य योग’ का निर्माण कर रहा है।​

1. शक्ति राइज ग्लोबल फाउंडेशन और IKS का दृष्टिकोण​हमारी संस्था, शक्ति राइज ग्लोबल फाउंडेशन, का मुख्य आधार इंडियन नॉलेज सिस्टम (IKS) है। हम शिक्षा और जीवन पद्धति को केवल आधुनिक पैमानों तक सीमित नहीं मानते, बल्कि उसे प्रकृति के उन सूक्ष्म नियमों से जोड़ते हैं जो हमारे ऋषियों ने प्रतिपादित किए हैं।​जल की ऊर्जा और आयुर्वेद: IKS के अनुसार, माघ मास में सूर्य और चंद्रमा की विशेष स्थिति के कारण पवित्र नदियों का जल ‘अमृततुल्य’ हो जाता है।​आरोग्य का विज्ञान: इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में किया गया स्नान शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) को बढ़ाता है। यह आयुर्वेद और भौतिक विज्ञान के सामंजस्य का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।​

2. ज्योतिषीय विश्लेषण: पुष्य नक्षत्र और रवि-पुष्य योग​एक ज्योतिषाचार्य के रूप में, मैं इस वर्ष की पूर्णिमा को अत्यंत दुर्लभ मानती हूँ:​नक्षत्र सम्राट पुष्य: पुष्य नक्षत्र का अर्थ है ‘पोषण करने वाला’। इसके स्वामी शनि देव हैं और अधिष्ठाता देव देवगुरु बृहस्पति हैं। यह नक्षत्र सुख, समृद्धि और शुभ कार्यों की सिद्धि के लिए सर्वोत्तम है।​रवि-पुष्य योग: रविवार के दिन पुष्य नक्षत्र का होना मंत्र साधना, निवेश और नए कार्यों के श्रीगणेश के लिए एक ‘स्वयंसिद्ध मुहूर्त’ बनाता है।​चंद्रमा की स्थिति: चंद्रमा इस दिन अपनी स्वराशि कर्क में होंगे, जो साधकों को मानसिक एकाग्रता और आंतरिक शांति प्रदान करेंगे।​

3. साधना, दान और सात्विक संस्कार​शक्ति राइज ग्लोबल फाउंडेशन के माध्यम से हम समाज में सात्विक संस्कारों के प्रसार हेतु संकल्पित हैं। इस पावन दिन के कुछ विशेष क्रियाकलाप निम्नलिखित हैं:​पितृ तर्पण: माघ पूर्णिमा पर किया गया तर्पण पूर्वजों को तृप्ति प्रदान करता है और परिवार में सुख-शांति लाता है।​दान की महिमा: हमारी परंपरा में ‘दान’ को केवल सहायता नहीं बल्कि ऊर्जा का सकारात्मक विनिमय माना गया है। तिल, गुड़, और विशेषकर ‘विद्या दान’ आज के दिन अनंत गुना फल प्रदान करता है।

​व्यसन मुक्ति और सात्विकता: एडवोकेट और ज्योतिषाचार्य के रूप में मेरा यह दृढ़ विश्वास है कि पर्व हमारे जीवन को अनुशासित करने के लिए होते हैं। इस दिन शराब या किसी भी प्रकार के व्यसन से दूर रहकर पूर्ण सात्विकता अपनाना ही इस महापर्व की सच्ची सार्थकता है।​4. हमारा उद्देश्य​शक्ति राइज ग्लोबल फाउंडेशन के माध्यम से हमारा प्रयास है कि हम आधुनिक युग की चुनौतियों का समाधान अपनी प्राचीन भारतीय मेधा और शास्त्रों के प्रकाश में खोजें। हम एक ऐसी शिक्षा व्यवस्था की पैरवी करते हैं जहाँ ‘इंडियन नॉलेज सिस्टम’ विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास का आधार बने।​निष्कर्ष:1 फरवरी 2026 की यह पूर्णिमा आपके जीवन में पुष्य नक्षत्र की तरह पोषण और चंद्रमा की तरह शीतलता लेकर आए। आइए, अपनी जड़ों की ओर लौटें और अपनी समृद्ध विरासत पर गर्व करें।​आप सभी को शक्ति राइज ग्लोबल फाउंडेशन की ओर से माघ पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं!

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